रिपोर्ट-// अमन सक्सेना
मुरैना। अंतर्राष्ट्रीय वैदिक शास्त्रार्थ विजेता एवं नागजी पीठाधीश्वर पैमावतार डॉ. नागाजी सरकार ने गौ संरक्षण, मंदिरों के सरकारी नियंत्रण एवं अन्य धार्मिक विषयों को लेकर आयोजित प्रेस वार्ता में अपने विचार व्यक्त किए।
प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि गौमाता को "राज्य माता" का दर्जा दिया जाना चाहिए। उनका कहना था कि गौमाता करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र हैं, इसलिए उनका वध पूरी तरह बंद होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी सरकार से नहीं है, बल्कि वे गौमाता के संरक्षण और सम्मान के पक्ष में अपनी बात रख रहे हैं।
राम मंदिर पर भी दिया बयान
डॉ. नागाजी सरकार ने राम मंदिर के मुद्दे पर भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वर्षों तक जिस रामलला के लिए कारसेवकों ने संघर्ष किया, लाठियां और गोलियां खाईं, उस विषय को लेकर उनके मन में कई प्रश्न हैं। इस संबंध में उन्होंने अपनी व्यक्तिगत राय भी रखी।
मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने की मांग
महाराज ने कहा कि देश में सिखों के गुरुद्वारे, मुस्लिम समुदाय की मस्जिदें और ईसाई समाज के चर्च सरकारी नियंत्रण से मुक्त हैं, जबकि कई स्थानों पर हिंदू मंदिरों का संचालन सरकारी व्यवस्था के अधीन है।
उन्होंने मांग की कि मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त किया जाए, ताकि उनकी देखरेख, प्रबंधन और धार्मिक गतिविधियों का संचालन संत समाज एवं सनातन समाज स्वयं कर सके।
उन्होंने कहा कि सरकार को अपने प्रशासनिक कार्यों और शासन व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए, जबकि मंदिरों का संचालन संत समाज और श्रद्धालुओं पर छोड़ देना चाहिए।
गौ संरक्षण को लेकर कही यह बात
प्रेस वार्ता के अंत में डॉ. नागाजी सरकार ने कहा कि जो व्यक्ति गौमाता के संरक्षण और सम्मान के पक्ष में खड़ा है, वही वास्तविक संत है। उन्होंने दोहराया कि उन्हें किसी प्रकार के सरकारी लाभ या सहायता की आवश्यकता नहीं है, बल्कि उनकी प्राथमिकता केवल गौमाता का संरक्षण और सम्मान है।
नोट: प्रेस वार्ता में व्यक्त सभी विचार एवं बयान संबंधित संत डॉ. नागाजी सरकार के हैं। समाचार का उद्देश्य उनके वक्तव्यों को तथ्यात्मक रूप से प्रस्तुत करना है।
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